Tuesday, September 15, 2020

हम और हमारा मन: अमित चौधरी





एक मेले में एक बूढ़ा आदमी गुब्बारे यानि बैलून बेच रहा था। लाल, हरे, पीले, गुलाबी हर रंग के गुब्बारे। जब भी उसके गुब्बारे की बिक्री कम होने लगती वो एक गुब्बारा हवा में इस तरह से छोड़ देता कि गुब्बारा बहुत दूर तक आसमान में उड़ते हुए जाता। उड़ रहे गुब्बारों को देख बच्चे मचल उठते और फिर से गुब्बारे वाले की बिक्री बढ़ जाती। फिर जैसे ही उसकी बिक्री कम होने लगती वो फिर एक गुब्बारा हवा में छोड़ देता। 

बहुत देर से एक छोटा स बच्चा गुब्बारे वाले को देख रहा था। हिम्मत करके वो बच्चा गुब्बारे वाले के पास गया। गुब्बारे वाले ने उससे पूछा- बोलो गुब्बारे चाहिए? बच्चे ने बड़ी ही मासूमियत से उस बूढ़े से कहा- अंकल क्या काले गुब्बारे भी उड़ते हैं? बच्चे के इस सवाल पर बूढ़े ने उसे बहुत प्यार से समझाया- ‘बेटे गुब्बारे अपने रंग की वजह से नहीं बल्कि उसके अंदर जो गैस भरा है न उसकी वजह से उड़ता है।’
दोस्तों कुछ ऐसी ही है हमारी ज़िंदगी भी। हम दिखते कैसे हैं, काले है या गोरे हैं, मोटे हैं या दुबले हैं, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। हमारे भीतर क्या भरा हुआ है, हमारी सोच क्या है, हमारे विचार कैसे हैं बस वही महत्वपूर्ण है। वही तय करता है कि हमारी उड़ान कैसी और कितनी दूर तक होगी। यह बात अगर आपके समझ में आ गई तो ज़िंदगी आसान हो जाती है। 

ज़िंदगी वो नहीं जो वो है, बल्कि ज़िंदगी तो वो है जो हम बनाते हैं। हमारा दिमाग, हमारा मस्तिष्क, हमारा माइंड जिस तरह से काम करता है हमें वैसे परिणाम भी मिलने लगते हैं। 

अपने शरीर को जिंदा रखने के लिए हम भोजन करते हैं। संतुलित पौष्टिक आहार हमें स्वस्थ रखता है और हमारे शारीरिक विकास को आकार देता है, ठीक वैसे ही हमें अपने दिमाग को भी खुराक देते रहना होता है जिससे हम मन माफ़िक परिणाम पा सकते हैं। 
अब सवाल उठता है कि मन को खुराक हम कैसे दे सकते हैं? दोस्तों, इसे यूं समझिए कि हर इंसान एक तीन मंज़िला मकान है और कभी आपने सोचा है कि वो इंसान अपनी पूरी ज़िंदगी छत पर टहलते हुए ही गुजार दे तो क्या उसे बुद्धिमान कहा जा सकता है? जब तक वो घर के भीतर नहीं उतरेगा वो बारिश और धूप में घिरा रहेगा। हमारे मस्तिष्क में भी कुछ ऐसे कमरे होते हैं, जिनमें हमें उतरना होता है। मस्तिष्क के इन कमरों को मनोवैज्ञानिकों ने चेतन मन (Conscious Mind), अवचेतन मन (Subconscious mind) और अचेतन मन (Unconscious Mind) का नाम दिया है।



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हम और हमारा मन: अमित चौधरी

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